निलंबित पंचायत सचिव ने निकाले 12 लाख रुपये करता रहा मनमानी


उन्नाव के सिकंदरपुर करन विकासखंड की ग्राम पंचायत मवइया माफी में तैनात सचिव ने निलंबन के बाद ग्राम निधि के खातों से 12 लाख रुपये निकाल लिए। बड़ी बात यह रही कि ब्लाक से लेकर जिलास्तरीय अधिकारी तक इससे अंजान रहे और निलंबित सचिव मनमानी करता रहा। 

ग्राम विकास अधिकारी अजीत सिंह के पास सिकंदरपुर करन की ग्राम पंचायत अचलगंज, मवइयामाफी, लखापुर, कर्मीबिजलामऊ व रिठनई का चार्ज था। चार दिसंबर को उसे मवइयामाफी ग्राम पंचायत में निर्माण कार्यों में अनियमितता पर निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद भी उसकी ग्राम पंचायतों के ग्राम निधि खाते बंद नहीं किए गए और न ही उससे भुगतान में लगाया जाने वाला डोंगल ही वापस लिया गया।

परिणामस्वरूप निलंबन के बाद भी खाते बंद न होने का सचिव ने फायदा उठाया। 5 दिसंबर को अचलगंज से 415065, 13 दिसंबर को 642364 रुपये, कर्मी बिजलामऊ से 76000 रुपये पांच दिसंबर को, लखापुर ग्राम पंचायत से 22500 रुपये 14 दिसंबर को निकाल लिए। सात दिसंबर को रिठनई ग्राम पंचायत से 47000 निकाले।

चार ग्राम पंचायतों से निकाली गई 12 लाख की राशि से किसी प्रकार का कोई भुगतान नहीं किया गया। प्रभारी बीडीओ चंद्रशेखर का कहना है कि नियमानुसार निलंबित होने के बाद सचिव ग्राम पंचायतों से धन आहरित नहीं कर सकता है। इसकी जांच कराकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यालय पत्र भेजा गया है। खानपान, आभूषण और वैवाहिक सामान देने में खर्च राशि की वसूली भी दोनों से कराने के आदेश डीएम ने दिए हैं। दो दिसंबर को निराला प्रेक्षागृह में 25 जोड़ों का सामूहिक विवाह हुआ था। इनमें नवाबगंज के सात जोड़े भी शामिल थे। नवाबगंज ब्लाक प्रमुख अरुण सिंह की शिकायत पर शुक्रवार को जिला समाज कल्याण अधिकारी ज्ञानेंद्र भदौरिया व बीडीओ नवाबगंज चंद्रशेखर ने ग्राम पंचायत एतबारपुर में जाकर जांच की थी।

जांच में पता चला था कि युवती शशि और युवक बृजभान पिछले पांच वर्षों से वैवाहिक जीवन जी रहे थे। उनके दो बच्चे भी हैं। शनिवार को दोनों अधिकारियों ने डीएम को रिपोर्ट सौंपी। जिलाधिकारी रवींद्र कुमार आदेश पर ग्राम पंचायत सचिव सुरेंद्र सिंह को निलंबित कर दिया गया है। एडीओ समाज कल्याण मदनचंद्र गुप्ता को निलंबित करने के लिए मुख्यालय को पत्र भेजा है।

समाज कल्याण अधिकारी ने बताया कि अभी वधू के खाते में भेजे जाने वाले 35 हजार रुपये जारी नहीं किए गए थे। हालांकि खानपान, आभूषण व वैवाहिक सामान देने में 16 हजार रुपये का खर्च आया है। डीएम ने इसकी वसूली सचिव व एडीओ समाज कल्याण से कराने के आदेश दिए हैं। प्रधान देवशंकर त्रिपाठी और लाभार्थी बृजभान पर कार्रवाई अभी तय नहीं हो सकी है।