3 सीटों के साथ कश्मीर में BJP का खाता खुला


जम्मू-कश्मीर में जिला विकास परिषद  चुनाव की 280 सीटों के लिए काउंटिंग जारी है। भाजपा के लिए अच्छी खबर है। उसने पहली बार कश्मीर के स्थानीय निकाय चुनाव में खाता खोला और तीन सीटें जीतीं। हालांकि, पीपुल्स अलायंस फॉर गुपकार डिक्लरेशन सबसे आगे है। यह गठबंधन दो सीट जीत चुका है और उसे 78 पर बढ़त हासिल है। भाजपा 46 सीटों पर आगे हैं। कांग्रेस को 21 पर बढ़त हासिल है। अन्य 38 सीटों पर आगे चल रहे हैं या फिर इन्हें जीत चुके हैं।

महबूबा मुफ्ती की पार्टीके नेता वहीद पारा चुनाव जीत गए हैं। उन्हें कुछ दिनों पहले एनआईए ने गिरफ्तार किया था। जीत से उत्साहित गुपकार अलायंस ने कहा- यह अनुच्छेद 370 पर रेफरेंडम है।

आर्टिकल 370 हटने के बाद यहां पहली बार हुए चुनाव हुए। गुपकार अलायंस के तहत 6 पार्टियों ने मिलकर चुनाव लड़ा था। जम्मू-कश्मीर में की 280, वार्ड की 234 और पंच-सरपंच की 12,153 सीटों के लिए 8 फेज में चुनाव हुए थे। इनमें 51% वोटिंग हुई थी। 28 नवंबर को पहले फेज की वोटिंग हुई थी, जबकि 19 दिसंबर को 8वें और आखिरी फेज की वोटिंग हुई थी।

जम्मू-कश्मीर के इतिहास में यह पहली बार है, जब 6 प्रमुख पार्टियों ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा। आर्टिकल 370 हटने के बाद इन पार्टियों ने मिलकर गुपकार अलायंस बनाया है। इसमें डॉ. फारूक अब्दुल्ला की अध्यक्षता वाली नेशनल कॉन्फ्रेंस, महबूबा मुफ्ती की अगुआई वाली पीडीपी के अलावा सज्जाद गनी लोन की पीपुल्स कॉन्फ्रेंस, अवामी नेशनल कॉन्फ्रेंस, जम्मू-कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट और माकपा की स्थानीय इकाई शामिल है। वहीं, भाजपा और कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार उतारे। मौजूदा राजनीतिक समीकरणों के मुताबिक, गुपकार अलायंस कश्मीर में ताकतवर है, जबकि भाजपा की स्थिति जम्मू में काफी मजबूत है।

जम्मू-कश्मीर के लोगों और नेताओं के लिए यह चुनाव किसी इम्तिहान जैसा रहा। यहां लंबे समय से पंचायती राज को लागू करने की मांग की जा रही थी। अब सरकार का दावा है कि पंचायत और उसके बाद अब  चुनाव होने से थ्री टियर सिस्टम पूरी तरह लागू हो गया है। जम्मू-कश्मीर में कुल 20 जिले हैं। हर जिले में  के लिए 14 क्षेत्र बनाए गए थे।

जम्मू और कश्मीर में हर जिले के बुनियादी मुद्दे भले अलग हों, लेकिन भ्रष्टाचार और बेरोजगारी मुख्य मुद्दे हैं। गावों की सड़कें, पंचायत घर, स्कूल, अस्पताल बिजली, पानी और उसके बाद एग्रीकल्चर में सरकारी स्कीमों का लाभ चुनावी मुद्दा रहे। भाजपा ने इस चुनाव में प्रत्याशी से ज्यादा प्रधानमंत्री के नाम पर वोट बांटा।

भाजपा के लिए जम्मू कश्मीर में लिटमस टेस्ट के रूप में देखा जा रहा है। अब विधानसभा क्षेत्रों का डी लिमिटेशन होना है। इसके बाद विधानसभा चुनाव होंगे। हालांकि, यह चुनाव पूरी तरह से भाजपा, कांग्रेस,के लिए एक टेस्ट के तौर पर देखा जा रहा है। नतीजों के विश्लेषण से पार्टियां यह जान सकेंगी कि उनकी सियासी जमीन कहां और कितनी है।


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