कृषि मंत्री की किसानों से अपीलबातचीत से निकालें हल

 


 

केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहा किसानों का आंदोलन शुक्रवार को 16वें दिन में प्रवेश कर चुका है. 16 दिनों से दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर डटे किसानों ने केंद्र सरकार से किसी भी तरह का समझौता करने से इनकार कर दिया है. केंद्र की तरफ से संशोधन का प्रस्ताव भेजे जाने के बाद किसानों ने इसे मानने से इनकार कर दिया था और कहा था कि अगर सरकार कानून वापस नहीं लेती है तो वो अपना विरोध-प्रदर्शन और तेज करेंगे. वहीं, बीते 7 दिसंबर को सिंघु बॉर्डर की रेड लाइट पर बैठे किसानों के खिलाफ पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है.

किसानों की ओर से प्रस्ताव ठुकराए जाने के बाद कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी, जिसके बाद गुरुवार को उन्होंने किसानों से अपील की थी कि वो सरकार के प्रस्तावों पर विचार करें और अपना आंदोलन खत्म् करें. उन्होंने यह भी कहा था कि सरकार बातचीत के लिए हमेशा तैयार है. हालांकि, किसानों ने अपना रुख बदलने से इनकार कर दिया है.

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शुक्रवार को कहा कि बीजेपी सरकार हृदयहीन रवैया अपनाकर किसानों की घोर उपेक्षा कर रही है और सरकार को पोषण करने वालों का शोषण बंद करना चाहिए . यादव ने शुक्रवार को एक ट्वीट में कहा, 'सड़कों पर ठिठुरते आंदोलनकारियों की जायज़ मांगों को लेकर बीजेपी सरकार हृदयहीन रवैया अपनाकर किसानों की घोर उपेक्षा कर रही है. इस पर जो वैश्विक प्रतिक्रिया आ रही है, उससे दुनियाभर में भारत की लोकतांत्रिक छवि को गहरी ठेस पहुंची है. बीजेपी सरकार पोषण करनेवालों का शोषण करना बंद करे.'

समाजवादी पार्टी किसानों के आंदोलन का समर्थन कर रही है. किसानों के आंदोलन के समर्थन में यादव और पार्टी कार्यकर्ता सोमवार को सड़कों पर भी उतरे थे और उन्होंने धरना प्रदर्शन किया था. इस मामले में यादव और सपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ गौतम पल्ली पुलिस थाने में मामला भी दर्ज हुआ 
सरकार अपने अभियान के तहत इन कानूनों को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देगी. इसके जरिए बीजेपी कृषि कानूनों पर जनमत अपने पक्ष में करना चाहती है. सरकार किसान संगठनों द्वारा उठाए गए मुद्दों का समाधान करने के प्रयासों के बारे में भी जानकारी देगी. इसके तहत सरकार और किसान संगठनों की बातचीत का ब्यौरा जनता के सामने रखा जाएगा.

 


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