आइए जानते हैं कि पहले क्या कानून थे, नए कानूनों में क्या बदलाव हुआ और क्यों हो रहा है इनका विरोध

 


 केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ हजारों किसान दो सप्ताह से दिल्ली की सीमाओं पर डटे हुए हैं। नए कृषि कानूनों को लेकर किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच चल रही तनातनी खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन लगातार जारी है। किसानों की मांग है कि सरकार इन तीनों कानून को वापस ले। सरकार कानून वापस लेने की बजाए सिर्फ संशोधन का प्रस्ताव दे रही है। इसी बीच किसान संगठनों ने उच्चतम न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया है। सरकार और प्रदर्शनकारी किसानों के बीच वार्ता का अब तक कोई नतीजा नहीं निकला है। दरअसल सितंबर के लोकसभा सत्र में केंद्र सरकार किसानों से जुड़े तीन बिल लेकर आई और विरोध के बावजूद ये बिल कानून बन गए हैं।  

1955 के आवश्यक वस्तु कानून के तहत 'आवश्यक वस्तुओं' की बिक्री, उत्पादन, आपूर्ति आदि को आम जनता के हित के लिए नियंत्रित किया जाता है। इस कानून के तहत ये ध्यान दिया जाता है कि उपभोक्ताओं को सही कीमत पर चीजें मिल रही हैं या नहीं। केंद्र सरकार के पास अधिकार होता है कि वह राज्यों को स्टॉक लिमिट तय करने और जमाखोरों पर नकेल कसने के लिए कहे ताकि चीजों की आपूर्ति प्रभावित न हो और दाम भी ज्यादा ना बढ़े। कुछ वस्तुएं ऐसी होती हैं जिसके बिना जीवन व्यतीत करना मुश्किल होता है। ऐसी चीजों को सरकार आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत आवश्यक वस्तु की सूची में डाल देती है।

नए कानून में क्या बदलाव हुआ?
इस कानून में अनाज, दलहन, तिलहन, खाद्य तेल, प्याज और आलू जैसी वस्तुओं को आवश्यक वस्तुओं की सूची से बाहर करने का प्रावधान है। ऐसा माना जा रहा है कि कानून के प्रावधानों से किसानों को सही मूल्य मिल सकेगा क्योंकि बाजार में स्पर्धा बढ़ेगी। 1955 के इस कानून में संशोधन किया गया है।


किसान संगठनों का आरोप है कि नए कानून के लागू होते ही कृषि क्षेत्र भी पूंजीपतियों या कॉरपोरेट घरानों के हाथों में चला जाएगा और इसका नुकसान किसानों को होगा। नए बिल के मुताबिक, सरकार आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई पर अति-असाधारण परिस्थिति में ही नियंत्रण लगाएंगी। ये स्थितियां अकाल, युद्ध, कीमतों में अप्रत्याशित उछाल या फिर गंभीर प्राकृतिक आपदा हो सकती है।

नए कानून में उल्लेख है कि इन चीजों और कृषि उत्पाद की जमाखोरी पर कीमतों के आधार पर एक्शन लिया जाएगा। सरकार इसके लिए तब आदेश जारी करेगी जब सब्जियों और फलों की कीमत 100 फीसदी से ज्यादा हो जाएगी या फिर खराब ना होने वाले खाद्यान्नों की कीमत में 50 फीसदी तक का इजाफा होगा।


Popular posts from this blog

घायलों की मदद करने वाले समाजसेवियों को किया गया सम्मानित

पूनम्स पब्लिक स्कूल में हुआ विज्ञान प्रदर्शनी का आयोजन

नेशनल मीडिया प्रेस क्लब हर सदस्य को उपलब्ध कराएगा स्वरोजगार का अवसर