अध्यक्ष की हत्या ने साबित किया कि यूपी में कानून व्यवस्था खराब

 


उत्तर प्रदेश के मोहनलाल गंज व्यापार मंडल के अध्यक्ष सुजीत पांडेय की हत्या का 6 दिन बाद भी खुलासा नहीं हो सका है। उनके परिजनों से मिलने प्रगतिशील समाजवादी पार्टी  के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल यादव पहुंचे। इस दौरान उन्होंने यूपी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि राजधानी में एक प्रतिष्ठित व्यक्ति की हत्या बताती है कि यूपी में कानून व्यवस्था की स्थिति कितनी खराब हो चुकी है। हमारी मांग है कि इस हत्याकांड का जल्द से जल्द खुलासा हो। यदि पुलिस सक्षम न हो तो मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए।

मोहनलालगंज व्यापार मंडल के अध्यक्ष व प्रधान पति सुजीत पांडेय अक्सर अकेले चलते थे सुजीत पांडे की हत्या के बाद लखनऊ पुलिस की करीब आधा दर्जन पुलिस टीमें अलग अलग तरीके और एंगल पर पूछताछ कर रही है। करीब 50 से ज्यादा लोगों से पुलिस अभी तक पूछताछ कर चुकी है लेकिन किसी की पास कोई खास सबूत या कोई संदिग्ध हाथ नहीं लगा है।

पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि सुजीत पांडे अकेले चलते थे जिसकी वजह से उनके बारे में पूरी जानकारी किसी को नहीं हो है। हालांकि सवाल यह उठ रहा है कि सुजीत पांडेय की रेकी आखिर किसने की, क्या सुजीत पांडेय घटना वाले दिन जिस समय पहुंचे थे वह अक्सर उसी समय अपने भट्टे में पहुंचते थे। 6 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस अभी तक इस मामले में कोई खास सुराग नहीं जुटा पाई है।

घटना के बाद से सुजीत पांडेय के परिजनों से मिलने वालों में सत्तारूढ़ पार्टी कि कई कद्दावर मंत्री शामिल हैं। इसमें डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा व कैबिनेट मंत्री बृजेश पाठक परिजनों के घर जाकर जल्द खुलासे का आश्वासन और सरकार उनके साथ होने का भरोसा दे चुके हैं। वहीं विपक्ष इस पूरे घटनाक्रम पर सरकार को घेरने में पीछे नहीं है। दो दिन पूर्व समाजवादी सरकार के पूर्व मंत्री अभिषेक मिश्रा, पवन पाण्डेय व अन्य नेता मृतक के परिजनों से मिलने पहुंचे थे।

बीते 20 दिसंबर को सुजीत पांडेय की गौरा भट्टा के पास बाइक सवार दो बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। वहीं जांच कर रही पुलिस टीम साल 2019 में हुई एक हत्या के साथ इसहत्या को जोड़कर देख रही है। दोनों मृतकों का प्रॉपर्टी से संबंधित कारोबार था। दोनों के पास लाइसेंसी असलहा था। दोनों अकेले चलते थे।

वारदात के दिन भी दोनों खुद ही अपनी गाड़ी चला कर गए थे। वारदात का तरीका भी एक ही जैसा था। बाइक सवार बदमाशों ने गाड़ी से उतरते समय गोलियां बरसाईं। तरीका भी भाड़े के शूटरों जैसा ही था। सिर्फ अंतर इतना था कि अशोक की हत्या में .30 बोर का असलहा प्रयोग किया गया था, वहीं सुजीत पांडेय की हत्या में 9 एमएम पिस्तौल का। पुलिस को आशंका है कि दोनों वारदात एक ही गिरोह ने अंजाम तो नहीं दी हैं। शूटर भले ही अलग-अलग थे।

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