कानपुर रेलवे स्टेशन को छह साल में क्यों खोला गया


 कानपुर, ट्रेनों का दिनों दिन संचालन बढऩे के कारण 1885 में बना पुराना कानपुर स्टेशन छोटा पडऩे लगा था। ट्रेनों का लोड और यात्रियों की अधिक संख्या बढऩे के बाद नए इमारत की जरूरत महसूस हुई तो सेंट्रल स्टेशन के भव्य इमारत की आधारशिला रखी गई। चार साल में ही रेलवे स्टेशन बनकर तैयार हो गया, लेकिन इसे पूरी तरह छह साल बाद से खोला गया था। 

पुराना कानपुर स्टेशन से एक किमी दूर वर्ष 1926 में नए भवन के लिए जमीन चिह्नित की गई थी। नक्शा आदि पास होने के बाद अंग्रेज इजीनियरत जांन एच ओनियन की देखरेख में भवन का निर्माण शुरू हुआ तो इमारत को बनने में करीब चार साल लग गए। इमारत के निर्माण में तब 77 लाख रुपये का खर्च आया था, जिसमें जूही में नहर को पाटकर नया मालगोदाम भी बनाया गया। 27 मार्च 1939 को रेलवे स्टेशन का उद्घाटन किया गया, जिसके तत्काल बाद इसे ट्रेनों के लिए खोल दिया गया। इस दौरान पुराना कानपुर रेलवे स्टेशन से भी ट्रेनों का संचालन होता रहा। 

शुरूआत में नए रेलवे स्टेशन पर तीन प्लेटफार्म थे, जिन्हेंं बाद में दस प्लेटफार्म तक विस्तारित किया गया। सबसे पहले इसे कन्नौज और फिर हावड़ा रूट से जोड़ा गया। वर्तमान में सेंट्रल स्टेशन का संचालन उत्तर मध्य रेलवे के अंतर्गत किया जाता है। सेंट्रल स्टेशन प्रयागराज मंडल का एक रेलवे स्टेशन है। कानपुर में कई रेलवे स्टेशन हैं हालांकि बहुत कम लोग जानते हैं कि गोविंदपुरी, पनकी और चकेरी उत्तर मध्य रेलवे द्वारा संचालित होते हैं जबकि अनवरगंज, रावतपुर और कल्याणपुर रेलवे स्टेशन का संचालन व प्रबंधन उत्तर पूर्व रेलवे करता है। बता दें एक ट्रेन से 1930 में शुरू हुआ यह सफर आज करीब 415 ट्रेनों तक पहुंच चुका है।