वेदों में है मनुष्य की हर समस्या का समाधान - आर्य समाज में वही वेद की गंगा


कानपुर। आर्य समाज में रविवार से प्रारंभ हुए  पांच दिवसीय सामवेद पारायण यज्ञ में पहले दिन वेद की गंगा बही।यज्ञ का आरंभ वैदिक विधि विधान से हुआ ।उपदेशक आचार्य सोमदेव जी ने कहा कि आर्य समाज एक संगठन मात्र नहीं बल्कि आडंबर, अंधविश्वास एवं सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आंदोलन है। समाज व राष्ट्र की उन्नति के लिए आर्य समाज का मजबूत होना बहुत जरूरी है। 

गोविंद नगर स्थित आर्य समाज सत्संग हॉल में आयोजित यज्ञ में यजमानो ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आहुतियां दी। आचार्य सोमदेव जी ने प्रवचन करते हुए कहा कि मनुष्य वेदों में बताए कर्तव्यो का पालन कर ही सच्चा मनुष्य बनता है ।उन्होंने कहा कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर परिसर में भव्य वेद विद्यालय अथवा गुरुकुल खुल जाए तो राम का मंदिर सार्थक हो जाएगा। उन्होंने कहा कि अविद्या ही हमारे दुखों का सबसे बड़ा कारण है। दुख में सुख ढूंढना व अपवित्रता में पवित्र  ढूंढना यही हमारे भटकने का मूल कारण है। राजस्थान सवाई माधोपुर वैदिक गुरुकुल से पधारे वेद पाठी ब्रह्मचारी विकास जी एवं ब्रह्मचारी अक्षय जी स्वामी आत्मानंद जी ने कहा कि  मनुष्य कहलाने का कारण परमात्मा द्वारा हमें बुद्धि व ज्ञान दिया जाना है हमें उस ज्ञान को प्राप्त कर मनन पूर्वक अपने कर्तव्यों का निर्धारण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारा देश आदिकाल से ऋषि-मुनियों और विद्वानों का देश रहा है। ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद तथा अथर्ववेद यह चारो ही  सत्य ,ज्ञान  व विद्या की पुस्तकें हैं। वेदों का अध्ययन करने से ही हमें मानव जीवन के कर्तव्यों का ज्ञान होता है। जीव के ईश्वर, संसार व अपने प्रति क्या कर्तव्य है यह सब वेदों से जाना जाता है। हमारे देश में वेदों के आधार पर शासन व्यवस्थाएं चलती थी। लोग सुखी रहते थे। शारीरिक, आत्मिक व सामाजिक उन्नति करते थे और त्याग से युक्त परोपकार में जीवन व्यतीत करते थे ।आज भी वेद एवं वैदिक जीवन ही सार्थक एवं प्रासंगिक है। आर्य समाज वैदिक धर्म पर आधारित व संगठन है जो धर्म और धर्म की व्याख्या तुला पर तौल कर करता है स्त्रियों को शिक्षा का अधिकार दिलाने वाले आर्य समाज ने विधवा विवाह पर सरकार को कानून बनाने पर मजबूर कर दिया। वेद का अर्थ होता है ज्ञान ,वेद पुरातन ज्ञान- विज्ञान का अथाह भंडार है। इसमें मानव की हर समस्या का समाधान है। संगीताचार्य व भजनोपदेशक भानु प्रकाश आर्य ने भजनों व संगीत के माध्यम से वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

यज्ञ मे प्रमुख रुप से शुभ कुमार वोहरा, पूर्व विधायक अजय कपूर, वीरेन्द्र मल्होत्रा, प्रकाश वीर आर्य, शम्मी कपूर, वीरा चोपड़ा, सुरेन्द्र गेरा, सत्यकेतु शास्त्री आदि ने आहुतियां दी।